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कौशल प्रदान करना, उद्योग सशक्तीकरण

कौशल विकास और प्रशिक्षण एवं अनुसंधान तथा जेमोलॉजिकल सर्विसेज, जीजेईपीसी के लगभग अपनी स्थापना के बाद से एजेंडे पर है। आज पांच शहरों में सात शैक्षणिक संस्थान और चार जेमोलोजिकल प्रयोगशालाएं जीजेईपीसी की छत्री तले हैं। उद्योग के लिए प्रशिक्षित मानव-शक्ति संसाधनों का एक पूल बनाने के स्पष्ट उद्देश्य के साथ परिषद ने शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की, जो देश के उद्योग के लिए प्रमुख केंद्रों में रत्न तथा आभूषणों में पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं। सभी गैर-लाभदायी संगठनों के पास, इन सभी में अत्याधुनिक उपकरणों और आधुनिक सुविधाएं हैं।

संस्थान
दि इन्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ जेम एण्ड जूलरी (आईआईजीजे)

आईआईजीजे को पहली बार 2003 में मुंबई में एक संस्थान के रूप में स्थापित किया गया था जो परिषद के अगले स्तर तक शैक्षणिक प्रयास करेगा। संस्थान को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक स्थापित किया गया और आधुनिक उद्योग के लिए पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के लिए उपयुक्त एक उत्कृष्ट संकाय और एक उन्नत पाठ्यक्रम है। ""दि स्ट्रांग"" आज एक प्रमाणित और लोकप्रय उनके लिए है जो रत्न तथा आभूषण उद्योग में प्रवेश कर रहे हैं। । जब मुख्य परिसर अन्धेरी में सीप्ज् के पास और एमआईडीसी में तथा वहां ताडदेव में भी एक परिसर है। .

हाल ही में, जीजेईपीसी ने शैक्षणिक क्षेत्र में अपने विभिन्न फैले हुए प्रयासों को आदर्श के अनुरूप और तर्कसंगत बनाने की मांग की है और विभिन्न संस्थानों को आईआईजीजे के अधीन लाया गया हैइसलिए, परिषद आज आईआईजीजे दिल्ली, आईआईजीजे जयपुर और आईआईजीजे कोलकाता को भी चला रही है।

इन्डियन डायमंड इन्स्टिट्यूट ( आईडीआई )

आईडीआई आदर्श रूप में सूरत में स्थित है, जो भारत में हीरों के उद्योग का सबसे पहला केंद्र है। यह आकांक्षियों के लिए शैक्षणिक पाठ्यक्रम प्रदान करता है और रत्न परीक्षण और अनुसंधान एवं विकास गतिविधियां में कार्यरत है।

जेमोलॉजिकल इन्स्टिट्यूट ऑफ इन्डिया (जीआईआई)

1971 में स्थापित, जीआईआई जेमॉलॉजिकल और प्रशिक्षण के लिए एक स्थापित और इसके अनुसंधान एवं विकास कार्य के लिए स्वीकृत केंद्र बन चुका है। यह एक उच्च प्रशिक्षित और योग्यता में सक्षम है, जिसका रत्नों और हीरों पर देश में नियमित रूप से शोध पत्र प्रस्तुत करने का एकाधिकार है।

जेम टेस्टिंग लेबोरेटरी, जयपुर (जीटीएल)

जयपुर, देश में रंगीन रत्नों का एक प्रमुख केन्द्र है जिसकी जीटीएल के आधार क्रम में वहां अपनी एक प्रयोगशाला है। रंगीन रत्नों में इसकी अपनी एक विशेषता है और यह रत्नों के ग्रेड और अन्य प्रकार के प्रमाण पत्र जारी करता है।

इन्डियन जेमॉलोजिकल इन्स्टिट्यूट, देहली (आईजीआई)

नई दिल्ली में स्थित, आईजीआई, उत्तर भारत में उद्योग के रत्न परीक्षण और प्रमाणन आवश्यकताओं को पूरा करता है। हाल ही में इसने जडाऊ आभूषणों के लिए अपनी सेवाओं में से एक के रूप में प्रमाणन भी पेश किया है।

दि जेम एण्ड ज्वैलरी स्कील काउन्सिल ऑफ इन्डिया (जीजेएससीआई)

परिषद के शैक्षणिक प्रयासों में अतिरिक्त राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद (एनएसडीसी) के तत्वावधान में स्थापित जीजेएससीआई की स्थापना और रत्न तथा आभूषण क्षेत्र के अन्य संगठनों के सहयोग से एक नया अध्याय जोडा है। यह उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण के लिए एक समग्र योजना बनाने के लिए अनिवार्य है।

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